Wednesday, 5 February 2014

                           राजनीति कीचड  नहीं है .....
राजनीति नहीं जानता  पर थोड़ी बहुत   आठवी-दसवीं  मे पढीं किताबो से सही- गलत  की भिन्नता की समज अवश्य  रखता हूँ ।संवेधानिक  रूप से अगर   लोकतंत्र का पालन  किया जाए तो उस देश में जनता ही राज करती है।  लोकतंत्र में  पक्ष विपक्ष होता है। , सभी राजनैतिक   दलो का  अपना  एजेंडा होता  हैं , उस  एजेंडे के आधर  पर पार्टी  चुनाव  लडती   है , घोषणा  पत्र बनाये जाते  है। , अपनी अपनी रंणनिती  होती है  राजनैतिक   दलों में मतभेद  होता है।, रोप  प्रत्य़ारोप  लगाए जाते  है , और इसका सीधा  असर बहुत  बार  व्य़क्तिगत रुप से गाली –गलोच के रुप में भी देखने को मिलता है। , जो  सामान्य़  रुप  से  स्वाभाविक है , लेकिन इन सबसे य़े  निष्कर्ष  कतेही  ये  निकल कर सामने नहीं आना  चाहिए  की  राजनीति कीचड  हैं ।. देश संगठन  से चलता है , व्य़वस्था ऐसे ही नहीं बनती और बिना व्य़वस्था  के  देश अपाहीज  है।, नितीय़ों का,लोगो की  जरुरतों का , कानून , निय़मों  आदि का प्रचार-प्रसार  कर  उनको सही जगह  स्थगित कर उनका सुचारु रुप से संचालन करना किसी  संगठन के बिना सम्भव नहीं है। इन संगठनों  का प्रतिनिधत्व  करने के  लिए प्रतिनिधी   चूने जाते है,जिसे  नेता  कहा  जाता  है।.देश  की आर्थिक , सामाजिक  , व्यवसाय़िक , सामप्रदाय़िक ,लोंकतांत्रिक ,प्रसाशनिक  आदि  महत्वपूर्ण  कार्य़प्रणाली का संचालन करना कोई   खेल नहीं है जिसे शायद  हम लोग ज्य़ादा ही सहज  समजते  है  बल्कि  वो है  नहीं। .किसी नेता के नैत्रित्व  की आलोचना करना अलग बात है , वो लोकतंत्र का  हिस्सा   है ,पर कीसी एक की काय़प्रणाली से असंतुष्ट होकर राजनिती को किचड कह देना गलत है,व्य़र्थ है। और इसमें अरुची प्रदर्शित करने वाला  लोकतंत्र के लायक नहीं ।
                                                                                    और  रही बात  साप्रदाय़िकता  को राजनैतिक दलों  द्वारा बढावा देकर वोट बैंक बनाना नैतिक रुप से गलत है ,  य़े सभी राजनैतिक दल करते है।.ऐसी  राजनीति  रोकना  जनता के हाथ में है। " धर्मनिरपेक्षता "  जैसे  शब्दों  को सामाजिक विज्ञान  की किताबों  की आड  में छिपाने   य़ा उसका उपय़ोग  सिर्फ प्रशोन्नतरी के रूप में  करने  के बजाए  दैनिक   जीवन में उतारा जाए  तो  य़े कोई  मुददा  ही नही रह  जाता  चुनाव  लडने  का ।  इसलिए  गलत  राजनीति नहीं गलत  हम और आप है , गलत लोकतंत्र नही गलत  हम और आप  है। ....
                             Above content is not intended personally to any one,it’s just  an effort  to realise the basic responsibility ,one is keeping towards the nation rather than annoying the politics as it contain mudd and ‘’I am not interested in it’’.

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