Thursday, 21 August 2014

बडा सुख मिलता  है  जब ,य़ूंही  राह चलते चलते हंसा  जाता  है कोई.
दिलो  मे परिवर्तन की आग लगा जाता   है कोई ..
क्य़ोकि  ये आग है  ईर्ष्या  ग्रसित  दिलों  को  मीटा देने  वाली ...
ये आग है  अंतर मन के दीप जलाकर  सर्वत्र  ,जग मगा  देने वाली  
ये आग है साफल्य़  की मशाल को   उजागर  कर देने वाली ..
ये आग है लोगो में  बैठी  घ्रणा  को जला कर  राख कर देने  वाली ..

बडा सुख मिलता  है  जब ,य़ूंही  सावन में  मघुर  कोयल की आवाज  गुनगुना  जाता  है कोई ...
संगित से  स्वर का , नृत्य से  रोंमांच  का , काग़ज़ से  कलम का  , आलिंगन  करा  जाता  है कोई
क्य़ोंकि  ये स्वर है  मधुबन में मधुरता भर  रही उस कोयल  के   
ये रोमांच  है  सावन में  नृत्य कर  रीझा  देने वाले उस  मोर्य के  ...
ये बोल हैं, हारे हुए  मन को पुनह  जाग्रत  करले का आगाह  करने  वाली  उस कलम के


बडा सुख मिलता  है  जब ,य़ूंही   वातसल्य़  से  परोपकारी  बन जाता  है कोई ..
 छोटी सी घढिय़ाँ में ,सागर सा मन बना  जाता   है कोई ..
क्य़ोंकि  ये मन  है, किसी के प्रती  चेष्ठा  बदल देने  वाला ..
ये मन है,   कर्म योगी को  कर्म रोगी  बना देने वाला ..
ये मन है , सोचो तो आबाद कर देने वाला
ये मन है  , सोचो तो  सब कुछ बर्बाद कर देने  वाला ...



बडा सुख मिलता  है  जब ,य़ूंही  चलते चलते  जिंदगी  का  तात्पर्य़  बतला जाता  है कोई ..
व्य़र्थ  आबरु से  भरे  खलिय़ान  छोड़, दिलो  पर  राज करने का  गुण  शिखा जाता  है कोई ....
क्य़ोकि  ये आबरू  गहना नही,  पनपती घ्रणा  है  ...
ये आबरू सिर्फ  रिझा देने वाली एक  मृग तृष्णा है ..
ये चेतना करने य़ोग्य़ कोई राम नहीं ,ना ही कोई कृष्णा है
ऐसी सोच का अधीन है अगर तू ,.तो व्य़र्थ तेरा .य़े जिना है

बडा सुकून  मिलता  है  जब  सकारात्मक  सोच की सच्ची  ढांडस  बंधा जाता  है कोई ..
य़ूंहीराह चलते चलते जिंदगी जिना सिखा  जाता  है कोई ..


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