Monday, 27 October 2014

लक्ष ढूंढ़ते हैं

वे जिनको

वर्त्तमान से प्यार नहीं है

इस पल की गरिमा

पर जिनका

थोड़ा भी अधिकार नहीं है

इस क्षण की गोलाई देखो

आसमान पर लुढ़क रही

है

नारंगी तरुणाई देखो

दूर क्षितिज पर बिखर

रही है

पक्ष ढूंढते हैं वे जिनको

जीवन ये स्वीकार नहीं हैं

लक्ष ढूंढ़ते हैं

वे जिनको

वर्त्तमान से प्यार नहीं है

नाप नाप के पीने वालों

जीवन का अपमान न

करना

पल पल लेखा जोखा

वालों

गणित पे यूँ अभिमान न

करना

नपे तुले वे ही हैं जिनकी

बाहों में संसार नहीं है

लक्ष ढूंढ़ते हैं

वे जिनको

वर्त्तमान से प्यार नहीं है

ज़िंदा डूबे डूबे रहते

मृत शरीर तैरा करते हैं

उथले उथले छप छप

करते

गोताखोर सुखी रहते हैं

स्वप्न वही जो नींद उडा

दे

वरना उसमे धार नहीं है

लक्ष ढूंढ़ते हैं

वे जिनको

वर्त्तमान से प्यार नहीं है

कहाँ पहुँचने की जल्दी है

नृत्य भरो इस खालीपन

में

किसे दिखाना तुम ही

हो बस

गीत रचो इस घायल मन

में

पी लो बरस रहा है

अमृत

ये सावन लाचार नहीं है

लक्ष ढूंढ़ते हैं

वे जिनको

वर्त्तमान से प्यार नहीं है

कहीं तुम्हारी चिंताओं

की

गठरी पूँजी ना बन जाए

कहीं तुम्हारे माथे का बल

शकल का हिस्सा न बन

जाए

जिस मन में उत्सव होता

है

वहाँ कभी भी हार नहीं है

लक्ष ढूंढ़ते हैं

वे जिनको

वर्त्तमान से प्यार नहीं है

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