Tuesday, 23 December 2014

 आराध्य हो तुम ,तुम भी हो किसी के जिने की तमन्ना...
    
नीले आसमां के तले , तुम गीत कोई गुनगुनाए जाओ    
हरी बगीय़ा के बीच बैठ कोई, राग भौंरो का गाए जाओ ।
क्रतिम दुनिय़ा मे  काटों से बचकर फूलों की भाँति खिलखिलाए जाओ ।
य़े जिंदगी है रस भरी  , तुम मन्द-मन्द मुस्कुराए जाओ  ।

सीखर से उतर रही धरोहर , बिना कीसी की परवाह किये
छल- छल छलकता नीर ,असीम आनंद लिय़े
शिकाय़त हजार है,चट्टानो से ,पर उसी से अपनी एक पहचान लिय़े
निकल पडा हीम पर्वत छोड , विशाल समंदर से आलिंगन के  लिय़े ।

चन्द्र की गोलाई देखो, मानचित्रों से सजी  बडी है
कभी मुस्कुराता चेहरा ,तो कभी शक्ल किसी की मुरजाई पडी है।
चन्द्र रोए या हंसे, किसको उसके अध्यात्म की पडी है !!!!!!!!
सर्वत्र  जगमगाए शीत चाँदनी से,ऐसी आश हमेशा लगी पडी है

रोशन कर अपने मन को ,असीम आनंद उठाए जाओ
य़े जिंदगी है रस भरी  , तुम मन्द-मन्द मुस्कुराए जाओ।

आराध्य हो तुम भी ,तुम भी हो किसी के जिने की तमन्ना
दूसरो की काहे फिकर करते हो, प्रेरणाशोत होती है आलोचना .. ।
जिस इंसान ने मुसीबत ना देखी ,उसे बाकी है अभी ढंग से जिना
जिसने चुना फूलों का path  उसे य़ही पर स्व्रर्ग कहां से मिलना .. ।


सूख जाए य़े धरती तो य़ाद रहे, सावन फिर आएगा ।
मेघ आएंगे ,बरसा आएगी, खुशिय़ो से लदा रोँमाच आएगा ।
और लौट गय़ा सावन तो क्य़ा, नील गगन फिर लहराएगा ।
चंद्र होगा,सूर्य़ होगा,झीलमिलाते सितारों से आसमां फिर जगमगएगा ।

चला गया वक्त  य़ब तो ,किर कहां से लाओगे
ये लोग तुम्हारे है,असील प्रेम इन्ही मे किसी से पाओगे...
ना दोलत देगी वो शुकून,ना किसी और चीज.से भरमाओगे..
शुकून मिलेगा तो बस इस दिल की गहराई में...ये पल फिर कहां से लाओगे


हर्ष भरो ,उल्लास भरो जीवन में ,असीम आनंद उठाए जाओ
य़े जिंदगी है रस भरी  , तुम मन्द-मन्द मुस्कुराए जाओ 


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