ला तेरे लाल को इंसान बना दूँ,
ला तेरे लाल को इंसान बना दूँ,
दुनिया पूजे जितना महान बना दूँ।
तू कहे तो राम बना दूँ,
तू कहे तो रहमान बना दूँ।
पर बनना ही है तो कुछ ऐसा बन ,कि मानवता तेरी ऋणी हो जाए...
कोई याद करे तो बरसो तक करे ,ऐसी कोई जीवनी हो जाए।
सांप्रदायिकता कम, धर्मनिष्पेक्षता का जोंरो से आगाज हो जाए...
क्या राम क्या रहमान ,सब एक हो,ऐसी कोई करनी हो जाए....
ला तेरी इस आवाज को आव्हान बना दूँ,
दुनिया पूजे जितना महान बना दूँ।
तपस्या ऐसी कर कि सफलता तेरा मुकद्दर बन जाए….
जगत के नायकों में तू हो,और उन नायकों मे भी तू सिंकदर बन जाए…..
गिली माँटी की भाँति ढले ,ऐसी तेरी कोई फितरत बन जाए……
स्वार्थपरता से ऊपर उठ ,निष्पक्षता तेरी दिलभर बन जाए……
ला तेरे मुकद्दर की एक पहचान बना दूँ,
दुनिया जिसे गूँटे ,वैसा कोई जाम बना दूँ।
पत्थर की मूर्ति ,और मूर्तिकार की दी गई चोंटे ,
पुजनीय बन जाता है वो पत्थर ,हजार दर्द लिए समेटें।
क्या पता तू भी किसी रोज ऐसी ही कोई कहानी गढ बैठे
तझसे प्रेरित हो ,तेरी राह पर भी कोई चल बैठे।
ला किसी ऐसी ही कहानी का पैगाम बना दूँ
गुमनाम ,इस दुनिया में,तेरा कोई नाम बना दूँ।
अज्ञानता से भरी ,ये दुनिया क्या जाने शाहदत क्या होती है.
‘’शाहदत का नूर ’बटने वाली सजी महफिल ,से आने वाली इबादत क्या होती है।
‘’सूरवीर चक्र’’ पाने की ललायत क्या होती है….
खून से लदे पडे बदन पर ढंकी खाकी की पौशाक की विलायत क्या होती है।
‘’शाहदत की खूशबू ’’से महफूज मन को विरान बना दूँ,
दुनिया जिसे सिंचे ,वैसा कोई नाम बना दूँ।
राहगीर है तू ,तो राह भी है तेरी ।
सोच है तेरी ,तो समृद्धि भी है तेरी
और सच्ची लगन है तेरी तो ,दिल से इबादत है मेरी ।
ला तेरी सोच का तूफान बना दूँ
दुनिया पूजे जितना महान बना दूँ।
पकडले हाथ अगर चलना है तो ,
काटों के बीच पुष्प के भाँति खिलना है तो।
करले जिद्द ,अगर खुद पर रिंझना है तो,
गिर जाए तो क्या,गिर कर भी संभलना है तो।
ला ठंडी पडी उस जिद्द का उफान बना दूँ
दुनिया पूजे जितना महान बना दूँ ।
तू कहे तो इरफान बना दूँ
आबरू से भरे ,खलियान बना दूँ।
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